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अनुष्ठान

परिवार की सुख-शांति के लिए अनुष्ठान

कालसर्प पूजा
Kalsarp Pooja

संपूर्ण कालसर्प दोष शांति अनुष्ठान से सभी प्रकार के कालसर्प दोषों का नाश हो जाता है। जाने, कालसर्प योग क्या है?

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मंगल भात पूजा
Mangalbhat pooja

मंगल भात पूजा कुंडली में विद्धमान मंगल ग्रह की उग्रता को कम करने के लिए की जाती है। जाने, मंगलभात पूजा क्या है?

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महामृत्युंजय जाप
Mahamrityunjay Jaap

महामृत्युंजय मंत्र का जाप क्यों किया जाता है? शास्त्रों और पुराणों में असाध्य रोगों से मुक्ति और अकाल मृत्यु...

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नवग्रह जाप
Navgrah Jaap

चंद्र मंत्र: ओम श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमः । मंगल मंत्र: ओम क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम: । बुध मंत्र: ओम ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः । गुरु (गुरुवार के उपाय) मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।

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रुद्राभिषेक पूजा
Rudrabhishek Pooja

हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान शिव का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण होती हैं। भगवान शिव...

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अर्क/कुंभ विवाह
Ark/Kumbh Vivah

" अर्क विवाह से पुरुषों के विवाह में आ रहे समस्त प्रकार के दोषो से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है| जाने, अर्क विवाह क्या है? "

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बगलामुखी अनुष्ठान
Baglamukhi-Anushthan

मां राज राजेश्वरी बगलामुखी पूजन के द्वारा सभी शत्रु पर विजय एवं काम क्रोध आदि पर नियंत्रण भगवती आराधना अनुष्ठान जाप के द्वारा राज्य धन व्यापार कार्यक्षेत्र मैं यश विजय लाभ आदि प्राप्ति होती है

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चांडाल दोष
Chandal Dosh

बृहस्पति और राहु जब साथ होते हैं या फिर एक दूसरे को किन्ही भी भावो में बैठ कर देखते हो, तो गुरू चाण्डाल..

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ग्रहण योग
Grahan Yog

परेशानी वाली बात:- चंद्र-राहु या सूर्य-राहु की युति को ग्रहण योग कहते हैं। यदि बुध की युति राहु के साथ है...

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पितृ शांति
Pitra Shanti

पितृदोष और कालसर्पदोष का सबसे प्राचीन स्थान सिद्धवट घाट है यहीं पर पितरों को मुक्ति प्रदान होती है

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संतान गोपाल अनुष्ठान
Santan Gopal Anushthan

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने॥ प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:॥

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नव चंडी एवं शतचंडी अनुष्ठान
Nav Chandi and Shat Chandi Anushthan

दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है, उसे शतचंडी यज्ञ बोला जाता है।॥

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भैरव हवन रात्रि कालीन
Bherav Hawan Ratri Kalin

स्वर्णाकर्षण भैरव काल भैरव का सात्त्विक रूप हैं, जिनकी पूजा धन प्राप्ति के लिए की जाती है, यह हमेशा पाताल में रहते हैं| ठीक वैसे ही जैसे सोना धरती के गर्भ में होता है, इनका प्रिय प्रसाद दूध और मेवा है| इनके मदिरों में मदिरा-मांस सख्त वर्जित है|

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